मेरी तो हंसी ही नही रुक रही एक सीधा सादा मारवाड़ी सब्जी वाला मोहल्ले में सब्जी बेचता था, बहोत सी महिलाएं उससे उधार लेती वो चुप चाप दे देता और अपनी कॉपी में लिख लेता,,,, किसने कितने का उधार लिया,,, आश्चर्य की बात यह थी कि वह नाम किसी का नही जानता था
फिर भी वो कॉपी छुपकर देखता और बता देता था, की किसका कितना पैसा बचा है,,😳😳
एक दिन उसकी नजरों से छिपाकर उसकी कॉपी हमने गायब कर दी,,,, लिखा था,,,,,
जाडकी 20 रुपिया,,
कालकी18 रु
तिकानाक15 रु
पोंगी40 रु
हेडाली 20 रु
मातो खावनी 10 रु
गोरकी22 रु
बांदरी 35
डोड हुसियार 45
चोट्टी 25
लंबड़ी 40
बटली 14
श्री देवी 50
होटपालीस वाली 50
जीन्स वाली 17
😳😃😂😃😂😃😂🤣🤣
मैं शराब की बोतल लेकर घर की तरफ़ जा रहा था।
रास्ते में पड़ौस में रहने वाले पण्डित जी मिल गए और कहने लगे:
भाई, तुम शराब पीते हो, तुम नरक में जाओगे।
इस पर मैंने पूछा:
जनाब, लेकिन कोई शराब बेचता है तभी तो मैं ख़रीदता हूँ।
उस सुरेश का क्या होगा जो शराब बेचता है?
पण्डित: वो भी नरक की आग में जलेगा।
मैंने फिर पूछा:
तो उस रमेश का क्या होगा जो शराब की दूकान के बाहर चिकन बेचता है?
पंडित: वो तो सौ फ़ीसद नरक जायेगा।
मैंने फिर पूछा: और वो नाचने वाली मोनिका ?
पंडित: ये सब नरक में जायेंगे।
मैं बोला: फिर क्या दिक़्क़त है नरक जाने में?
जब शराब वाला वहां होगा,
चिकन वाला वहां होगा और
नाचने वाली मोनिका वहां होगी।
फिर तो वो स्वर्ग ही हुआ ना।
पंडित जी तब से मेरे साथ ही बैठे हैं,
तीन पेग के बाद सलाद काट रहे हैं।
सेल्फी लेने से मना कर रहे हैं।
😜😝😝😝😝😝
फूलवाला: "साहब अपनी गर्लफ्रेंड के लिए फूल ले लो..
.
लड़का: "मेरी गर्लफ्रेंड नहीं है..
.
फूलवाला: "तो मंगेतर के लिए ले लो...
लड़का : "मेरी मंगेतर नहीं है..
.
फूलवाला: "तो बीवी के लिए ले लो..
.
लड़का: "मेरी बीवी नहीं है...
.
फूलवाला: "ए दुनिया के
खुशनसीब इंसान.... मेरी तरफ से फूल फ्री में ले लो..
😄😜😂😄😜😳
परिवर्तन देखिये
1. पहले शादियों में घर की औरतें खाना बनाती थीं और नाचने वाली बाहर से आती थीं। अब खाना बनाने वाले बाहर से आते हैं और घर की औरतें नाचती हैं।
2- पहले लोग घर के दरवाजे पर एक आदमी तैनात करते थे ताकि कोई कुत्ता घर में न घुस जाये। आजकल घर के दरवाजे पर कुत्ता तैनात करते हैं ताकि कोई आदमी घर में न घुस जाए।
3- पहले आदमी खाना घर में खाता था और लैट्रीन घर के बाहर करने जाता था। अब खाना बाहर खाता है और लैट्रीन घर में करता है।
4- पहले आदमी साइकिल चलाता था और गरीब समझा जाता था। अब आदमी कार से ज़िम जाता है साइकिल चलाने के लिए।
चारों महत्वपुर्ण बदलाव हैं !
वाह रे मानव तेरा स्वभाव....
।। लाश को हाथ लगाता है तो नहाता है ...
पर बेजुबान जीव को मार के खाता है ।।
यह मंदिर-मस्ज़िद भी क्या गजब की जगह है दोस्तो.
जंहा गरीब बाहर और अमीर अंदर 'भीख' मांगता है..
विचित्र दुनिया का कठोर सत्य..
बारात मे दुल्हे सबसे पीछे
और दुनिया आगे चलती है,
मय्यत मे जनाजा आगे
और दुनिया पीछे चलती है..
यानि दुनिया खुशी मे आगे
और दुख मे पीछे हो जाती है..!
अजब तेरी दुनिया
गज़ब तेरा खेल
मोमबत्ती जलाकर मुर्दों को याद करना
और मोमबत्ती बुझाकर जन्मदिन मनाना...
Wah re duniya !!!!!
✴ लाइन छोटी है,पर मतलब बहुत बड़ा है ~
उम्र भर उठाया बोझ उस कील ने ...
और लोग तारीफ़ तस्वीर की करते रहे ..
〰〰〰〰〰〰
✴ पायल हज़ारो रूपये में आती है, पर पैरो में पहनी जाती है
और.....
बिंदी 1 रूपये में आती है मगर माथे पर सजाई जाती है
इसलिए कीमत मायने नहीं रखती उसका कृत्य मायने रखता हैं.
〰〰〰〰〰〰
✴ एक किताबघर में पड़ी गीता और कुरान आपस में कभी नहीं लड़ते,
और
जो उनके लिए लड़ते हैं वो कभी उन दोनों को नहीं पढ़ते....
〰〰〰〰〰〰〰〰
✴ नमक की तरह कड़वा ज्ञान देने वाला ही सच्चा मित्र होता है,
मिठी बात करने वाले तो चापलुस भी होते है।
इतिहास गवाह है की आज तक कभी नमक में कीड़े नहीं पड़े।
और मिठाई में तो अक़्सर कीड़े पड़ जाया करते है...
〰〰〰〰〰〰〰
✴ अच्छे मार्ग पर कोई व्यक्ति नही जाता पर बुरे मार्ग पर सभी जाते है......
इसीलिये दारू बेचने वाला कहीं नही जाता ,
पर दूध बेचने वाले को घर-घर
गली -गली , कोने- कोने जाना पड़ता है ।
〰〰〰〰〰〰〰〰
✴ दूध वाले से बार -बार पूछा जाता है कि पानी तो नही डाला ?
पर दारू मे खुद हाथो से पानी मिला-मिला कर पीते है ।
Very nice line
इंसान की समझ सिर्फ इतनी हैं
कि उसे "जानवर" कहो तो
नाराज हो जाता हैं और
"शेर" कहो तो खुश हो जाता हैं!
जबकि शेर भी जानवर का ही नाम है
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: देखो तो ख्वाब है जिंदगी
पढ़ो तो किताब है जिंदगी
सुनो तो ज्ञान है जिंदगी
पर हमें लगता है कि
हंसते रहो तो आसान है जिंदगी
एक प्रणाम 🙏 जीवन के कई
परिणामों को बदल देता है
शुभ प्रभात । सादर प्रणाम 🙏
#जयश्रीराम 🙏
🌹🌿🌺🌿💲🌿🌺🌿🌹🌿
नसीब जिनके
ऊँचे और मस्त होते हैं,
इम्तिहान भी उनके
जबरदस्त होते हैं...
अगर दूसरों को दुखी देखकर
आपको भी दुःख होता हैं तो,
समझ लो कि
भगवान् ने आपको इन्सान
बनाकर कोई गलती नहीं की हैं।।
दिल दुखाने पर भी
जो शख्स आपसे
शिकायत तक न करता हो
उस शख्स से ज्यादा प्यार,
आपको कोई और
नहीं कर सकता
🌿🌹🙏🏻शुभप्रभात🙏🏻🌹🌿
🌹😊सदैव मुस्कुराते रहिये..😊🌹
🌹🌿🌺🌿💲🌿🌺🌿🌹
: 🌹 सुप्रभात एवंम् मंगल कामनाऐं🌹
💎 जिंदगी मैं अपनेपन और एहसासों का बड़ा काम होता है...
दूसरों के गमों को जो अपनाता है वही इंसान होता है...
न जाने कब कोई अँधेरे मैं चिराग बनकर राह दिखा दे..
क्योंकि मुसीबत मैं जो साथ होता है वही भगवान होता है..!!
🌹Good morning🌹
🌺🙏आपका दिन शुभ हो🙏🌺
: "निंदा" से घबराकर अपने "लक्ष्य" को ना छोड़े क्योंकि...."लक्ष्य" मिलते ही निंदा करने वालों की "राय" बदल जाती है।
🌞🌞
"कोशिश"
आखिरी सांस तक करनी चाहिए,
या तो "लक्ष्य" हासिल होगा
या "अनुभव"
"चीजें दोनों ही अच्छी है।"
🍀 🍀 🙏🏻🌿🌿🌿
🙏🙏 सुप्रभात�
�🙏: दर्द कागज़ पर,
मेरा बिकता रहा,
मैं बैचैन था,
रातभर लिखता रहा..
छू रहे थे सब,
बुलंदियाँ आसमान की,
मैं सितारों के बीच,
चाँद की तरह छिपता रहा..
दरख़्त होता तो,
कब का टूट गया होता,
मैं था नाज़ुक डाली,
जो सबके आगे झुकता रहा..
बदले यहाँ लोगों ने,
रंग अपने-अपने ढंग से,
रंग मेरा भी निखरा पर,
मैं मेहँदी की तरह पीसता रहा..
जिनको जल्दी थी,
वो बढ़ चले मंज़िल की ओर,
मैं समन्दर से राज,
गहराई के सीखता रहा..!!
शुभ प्रभात🙏🏻🌹🙏🏻
अनपढ़ जाट पढ़ा जैसा, पढ़ा जाट खुदा जैसा”
यह घटना सन् 1270-1280 के बीच की है । दिल्ली में बादशाह
बलबन का राज्य था । उसके दरबार में एक अमीर दरबारी था ।जिसके
तीन बेटे
थे । उसके पास उन्नीस घोड़े भी थे । मरने से पहले वह वसीयत
लिख
गया था कि इन घोड़ों का आधा हिस्सा... बड़े बेटे को,
चौथाई
हिस्सा मंझले को और पांचवां हिस्सा सबसे छोटे बेटे को बांट
दिया जाये
।
बेटे उन 19 घोड़ों का इस तरह बंटवारा कर ही नहीं पाये और
बादशाह के
दरबार में इस समस्या को सुलझाने के लिए अपील की ।
बादशाह
ने
अपने सब दरबारियों से सलाह ली पर उनमें से कोई भी इसे हल
नहीं कर
सका ।
उस समय प्रसिद्ध कवि अमीर खुसरो बादशाह
का दरबारी कवि था ।
उसने जाटों की भाषा को समझाने के लिए एक पुस्तक
भी बादशाह के
कहने पर लिखी थी जिसका नाम “खलिक बारी” था ।
खुसरो ने
कहा कि मैंने जाटों के इलाक़े में खूब घूम कर देखा है और
पंचायती फैसले
भी सुने हैं और सर्वखाप पंचायत का कोई पंच ही इसको हल कर
सकता है ।
नवाब के लोगों ने इन्कार किया कि यह
फैसला तो हो ही नहीं सकता..!
परन्तु कवि अमीर खुसरो के कहने पर बादशाह बलबन ने सर्वखाप
पंचायत में अपने एक खास आदमी को चिट्ठी देकर गांव-अवार
(जिला- भरतपुर) राजस्थान भेजा (इसी गांव में शुरू से सर्वखाप पंचायत
का मुख्यालय चला आ रहा है और आज भी मौजूद है) ।
चिट्ठी पाकर पंचायत ने प्रधान पंच चौधरी रामसहाय सूबेदार
को दिल्ली भेजने
का फैसला किया। चौधरी साहब अपने घोड़े पर सवार होकर
बादशाह के
दरबार में दिल्ली पहुंच गये और बादशाह ने अपने सारे
दरबारी बाहर के
मैदान में इकट्ठे कर लिये । वहीं पर 19 घोड़ों को भी लाइन में
बंधवा दिया ।
चौधरी रामसहाय ने अपना परिचय देकर कहना शुरू किया -
“शायद
इतना तो आपको पता ही होगा कि हमारे यहां राजा और
प्रजा का सम्बंध बाप-बेटे का होता है और
प्रजा की सम्पत्ति पर
राजा का भी हक
होता है । इस नाते मैं जो अपना घोड़ा साथ लाया हूं, उस पर
भी राजा का हक बनता है । इसलिये मैं यह
अपना घोड़ा आपको भेंट
करता हूं और इन 19 घोड़ों के साथ मिला देना चाहता हूं, इसके
बाद मैं
बंटवारे के बारे में अपना फैसला सुनाऊंगा ।”
बादशाह बलबन ने इसकी इजाजत दे दी और चौधरी साहब ने
अपना घोड़ा उन 19 घोड़ों वाली कतार के आखिर में बांध
दिया, इस तरह
कुल बीस घोड़े हो गये ।
अब चौधरी ने उन घोड़ों का बंटवारा इस तरह कर दिया-
- आधा हिस्सा (20 ¸ 2 = 10) यानि दस घोड़े उस अमीर के बड़े
बेटे
को दे दिये ।
- चौथाई हिस्सा (20 ¸ 4 = 5) यानि पांच घोडे मंझले बेटे
को दे
दिये ।
- पांचवां हिस्सा (20 ¸ 5 = 4) यानि चार घोडे छोटे बेटे को दे
दिये ।
इस प्रकार उन्नीस (10 + 5 + 4 = 19)
घोड़ों का बंटवारा हो गया ।
बीसवां घोड़ा चौधरी रामसहाय का ही था जो बच गया ।
बंटवारा करके
चौधरी ने सबसे कहा - “मेरा अपना घोड़ा तो बच ही गया है,
इजाजत
हो तो इसको मैं ले जाऊं ?”
बादशाह ने हां कह दी और चौधरी साहब का बहुत सम्मान और
तारीफ
की । चौधरी रामसहाय अपना घोड़ा लेकर अपने गांव सौरम
की तरफ कूच
करने ही वाले थे, तभी वहां पर मौजूद कई हजार दर्शक इस पंच के
फैसले
से गदगद होकर नाचने लगे और कवि अमीर खुसरो ने जोर से
कहा -
“अनपढ़ जाट पढ़ा जैसा, पढ़ा जाट खुदा जैसा”।
सारी भीड़ इसी पंक्ति को दोहराने लगी । तभी से यह
कहावत
हरियाणा,
पंजाब, राजस्थान व उत्तरप्रदेश तंथा दूसरी जगहों पर फैल गई ।
यहां यह बताना भी जरूरी है कि 19 घोड़ों के बंटवारे के समय
विदेशी यात्री और इतिहासकार इब्नबतूता भी वहीं दिल्ली दरबार में
मौजूद था । यह वृत्तांत सर्वखाप पंचायत के अभिलेखागार में
मौजूद है। धन्यवाद।
ये है जाटों का इतिहास दोस्तों।
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फिर भी वो कॉपी छुपकर देखता और बता देता था, की किसका कितना पैसा बचा है,,😳😳
एक दिन उसकी नजरों से छिपाकर उसकी कॉपी हमने गायब कर दी,,,, लिखा था,,,,,
जाडकी 20 रुपिया,,
कालकी18 रु
तिकानाक15 रु
पोंगी40 रु
हेडाली 20 रु
मातो खावनी 10 रु
गोरकी22 रु
बांदरी 35
डोड हुसियार 45
चोट्टी 25
लंबड़ी 40
बटली 14
श्री देवी 50
होटपालीस वाली 50
जीन्स वाली 17
😳😃😂😃😂😃😂🤣🤣
मैं शराब की बोतल लेकर घर की तरफ़ जा रहा था।
रास्ते में पड़ौस में रहने वाले पण्डित जी मिल गए और कहने लगे:
भाई, तुम शराब पीते हो, तुम नरक में जाओगे।
इस पर मैंने पूछा:
जनाब, लेकिन कोई शराब बेचता है तभी तो मैं ख़रीदता हूँ।
उस सुरेश का क्या होगा जो शराब बेचता है?
पण्डित: वो भी नरक की आग में जलेगा।
मैंने फिर पूछा:
तो उस रमेश का क्या होगा जो शराब की दूकान के बाहर चिकन बेचता है?
पंडित: वो तो सौ फ़ीसद नरक जायेगा।
मैंने फिर पूछा: और वो नाचने वाली मोनिका ?
पंडित: ये सब नरक में जायेंगे।
मैं बोला: फिर क्या दिक़्क़त है नरक जाने में?
जब शराब वाला वहां होगा,
चिकन वाला वहां होगा और
नाचने वाली मोनिका वहां होगी।
फिर तो वो स्वर्ग ही हुआ ना।
पंडित जी तब से मेरे साथ ही बैठे हैं,
तीन पेग के बाद सलाद काट रहे हैं।
सेल्फी लेने से मना कर रहे हैं।
😜😝😝😝😝😝
फूलवाला: "साहब अपनी गर्लफ्रेंड के लिए फूल ले लो..
.
लड़का: "मेरी गर्लफ्रेंड नहीं है..
.
फूलवाला: "तो मंगेतर के लिए ले लो...
लड़का : "मेरी मंगेतर नहीं है..
.
फूलवाला: "तो बीवी के लिए ले लो..
.
लड़का: "मेरी बीवी नहीं है...
.
फूलवाला: "ए दुनिया के
खुशनसीब इंसान.... मेरी तरफ से फूल फ्री में ले लो..
😄😜😂😄😜😳
परिवर्तन देखिये
1. पहले शादियों में घर की औरतें खाना बनाती थीं और नाचने वाली बाहर से आती थीं। अब खाना बनाने वाले बाहर से आते हैं और घर की औरतें नाचती हैं।
2- पहले लोग घर के दरवाजे पर एक आदमी तैनात करते थे ताकि कोई कुत्ता घर में न घुस जाये। आजकल घर के दरवाजे पर कुत्ता तैनात करते हैं ताकि कोई आदमी घर में न घुस जाए।
3- पहले आदमी खाना घर में खाता था और लैट्रीन घर के बाहर करने जाता था। अब खाना बाहर खाता है और लैट्रीन घर में करता है।
4- पहले आदमी साइकिल चलाता था और गरीब समझा जाता था। अब आदमी कार से ज़िम जाता है साइकिल चलाने के लिए।
चारों महत्वपुर्ण बदलाव हैं !
वाह रे मानव तेरा स्वभाव....
।। लाश को हाथ लगाता है तो नहाता है ...
पर बेजुबान जीव को मार के खाता है ।।
यह मंदिर-मस्ज़िद भी क्या गजब की जगह है दोस्तो.
जंहा गरीब बाहर और अमीर अंदर 'भीख' मांगता है..
विचित्र दुनिया का कठोर सत्य..
बारात मे दुल्हे सबसे पीछे
और दुनिया आगे चलती है,
मय्यत मे जनाजा आगे
और दुनिया पीछे चलती है..
यानि दुनिया खुशी मे आगे
और दुख मे पीछे हो जाती है..!
अजब तेरी दुनिया
गज़ब तेरा खेल
मोमबत्ती जलाकर मुर्दों को याद करना
और मोमबत्ती बुझाकर जन्मदिन मनाना...
Wah re duniya !!!!!
✴ लाइन छोटी है,पर मतलब बहुत बड़ा है ~
उम्र भर उठाया बोझ उस कील ने ...
और लोग तारीफ़ तस्वीर की करते रहे ..
〰〰〰〰〰〰
✴ पायल हज़ारो रूपये में आती है, पर पैरो में पहनी जाती है
और.....
बिंदी 1 रूपये में आती है मगर माथे पर सजाई जाती है
इसलिए कीमत मायने नहीं रखती उसका कृत्य मायने रखता हैं.
〰〰〰〰〰〰
✴ एक किताबघर में पड़ी गीता और कुरान आपस में कभी नहीं लड़ते,
और
जो उनके लिए लड़ते हैं वो कभी उन दोनों को नहीं पढ़ते....
〰〰〰〰〰〰〰〰
✴ नमक की तरह कड़वा ज्ञान देने वाला ही सच्चा मित्र होता है,
मिठी बात करने वाले तो चापलुस भी होते है।
इतिहास गवाह है की आज तक कभी नमक में कीड़े नहीं पड़े।
और मिठाई में तो अक़्सर कीड़े पड़ जाया करते है...
〰〰〰〰〰〰〰
✴ अच्छे मार्ग पर कोई व्यक्ति नही जाता पर बुरे मार्ग पर सभी जाते है......
इसीलिये दारू बेचने वाला कहीं नही जाता ,
पर दूध बेचने वाले को घर-घर
गली -गली , कोने- कोने जाना पड़ता है ।
〰〰〰〰〰〰〰〰
✴ दूध वाले से बार -बार पूछा जाता है कि पानी तो नही डाला ?
पर दारू मे खुद हाथो से पानी मिला-मिला कर पीते है ।
Very nice line
इंसान की समझ सिर्फ इतनी हैं
कि उसे "जानवर" कहो तो
नाराज हो जाता हैं और
"शेर" कहो तो खुश हो जाता हैं!
जबकि शेर भी जानवर का ही नाम है
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: देखो तो ख्वाब है जिंदगी
पढ़ो तो किताब है जिंदगी
सुनो तो ज्ञान है जिंदगी
पर हमें लगता है कि
हंसते रहो तो आसान है जिंदगी
एक प्रणाम 🙏 जीवन के कई
परिणामों को बदल देता है
शुभ प्रभात । सादर प्रणाम 🙏
#जयश्रीराम 🙏
🌹🌿🌺🌿💲🌿🌺🌿🌹🌿
नसीब जिनके
ऊँचे और मस्त होते हैं,
इम्तिहान भी उनके
जबरदस्त होते हैं...
अगर दूसरों को दुखी देखकर
आपको भी दुःख होता हैं तो,
समझ लो कि
भगवान् ने आपको इन्सान
बनाकर कोई गलती नहीं की हैं।।
दिल दुखाने पर भी
जो शख्स आपसे
शिकायत तक न करता हो
उस शख्स से ज्यादा प्यार,
आपको कोई और
नहीं कर सकता
🌿🌹🙏🏻शुभप्रभात🙏🏻🌹🌿
🌹😊सदैव मुस्कुराते रहिये..😊🌹
🌹🌿🌺🌿💲🌿🌺🌿🌹
: 🌹 सुप्रभात एवंम् मंगल कामनाऐं🌹
💎 जिंदगी मैं अपनेपन और एहसासों का बड़ा काम होता है...
दूसरों के गमों को जो अपनाता है वही इंसान होता है...
न जाने कब कोई अँधेरे मैं चिराग बनकर राह दिखा दे..
क्योंकि मुसीबत मैं जो साथ होता है वही भगवान होता है..!!
🌹Good morning🌹
🌺🙏आपका दिन शुभ हो🙏🌺
: "निंदा" से घबराकर अपने "लक्ष्य" को ना छोड़े क्योंकि...."लक्ष्य" मिलते ही निंदा करने वालों की "राय" बदल जाती है।
🌞🌞
"कोशिश"
आखिरी सांस तक करनी चाहिए,
या तो "लक्ष्य" हासिल होगा
या "अनुभव"
"चीजें दोनों ही अच्छी है।"
🍀 🍀 🙏🏻🌿🌿🌿
🙏🙏 सुप्रभात�
�🙏: दर्द कागज़ पर,
मेरा बिकता रहा,
मैं बैचैन था,
रातभर लिखता रहा..
छू रहे थे सब,
बुलंदियाँ आसमान की,
मैं सितारों के बीच,
चाँद की तरह छिपता रहा..
दरख़्त होता तो,
कब का टूट गया होता,
मैं था नाज़ुक डाली,
जो सबके आगे झुकता रहा..
बदले यहाँ लोगों ने,
रंग अपने-अपने ढंग से,
रंग मेरा भी निखरा पर,
मैं मेहँदी की तरह पीसता रहा..
जिनको जल्दी थी,
वो बढ़ चले मंज़िल की ओर,
मैं समन्दर से राज,
गहराई के सीखता रहा..!!
शुभ प्रभात🙏🏻🌹🙏🏻
अनपढ़ जाट पढ़ा जैसा, पढ़ा जाट खुदा जैसा”
यह घटना सन् 1270-1280 के बीच की है । दिल्ली में बादशाह
बलबन का राज्य था । उसके दरबार में एक अमीर दरबारी था ।जिसके
तीन बेटे
थे । उसके पास उन्नीस घोड़े भी थे । मरने से पहले वह वसीयत
लिख
गया था कि इन घोड़ों का आधा हिस्सा... बड़े बेटे को,
चौथाई
हिस्सा मंझले को और पांचवां हिस्सा सबसे छोटे बेटे को बांट
दिया जाये
।
बेटे उन 19 घोड़ों का इस तरह बंटवारा कर ही नहीं पाये और
बादशाह के
दरबार में इस समस्या को सुलझाने के लिए अपील की ।
बादशाह
ने
अपने सब दरबारियों से सलाह ली पर उनमें से कोई भी इसे हल
नहीं कर
सका ।
उस समय प्रसिद्ध कवि अमीर खुसरो बादशाह
का दरबारी कवि था ।
उसने जाटों की भाषा को समझाने के लिए एक पुस्तक
भी बादशाह के
कहने पर लिखी थी जिसका नाम “खलिक बारी” था ।
खुसरो ने
कहा कि मैंने जाटों के इलाक़े में खूब घूम कर देखा है और
पंचायती फैसले
भी सुने हैं और सर्वखाप पंचायत का कोई पंच ही इसको हल कर
सकता है ।
नवाब के लोगों ने इन्कार किया कि यह
फैसला तो हो ही नहीं सकता..!
परन्तु कवि अमीर खुसरो के कहने पर बादशाह बलबन ने सर्वखाप
पंचायत में अपने एक खास आदमी को चिट्ठी देकर गांव-अवार
(जिला- भरतपुर) राजस्थान भेजा (इसी गांव में शुरू से सर्वखाप पंचायत
का मुख्यालय चला आ रहा है और आज भी मौजूद है) ।
चिट्ठी पाकर पंचायत ने प्रधान पंच चौधरी रामसहाय सूबेदार
को दिल्ली भेजने
का फैसला किया। चौधरी साहब अपने घोड़े पर सवार होकर
बादशाह के
दरबार में दिल्ली पहुंच गये और बादशाह ने अपने सारे
दरबारी बाहर के
मैदान में इकट्ठे कर लिये । वहीं पर 19 घोड़ों को भी लाइन में
बंधवा दिया ।
चौधरी रामसहाय ने अपना परिचय देकर कहना शुरू किया -
“शायद
इतना तो आपको पता ही होगा कि हमारे यहां राजा और
प्रजा का सम्बंध बाप-बेटे का होता है और
प्रजा की सम्पत्ति पर
राजा का भी हक
होता है । इस नाते मैं जो अपना घोड़ा साथ लाया हूं, उस पर
भी राजा का हक बनता है । इसलिये मैं यह
अपना घोड़ा आपको भेंट
करता हूं और इन 19 घोड़ों के साथ मिला देना चाहता हूं, इसके
बाद मैं
बंटवारे के बारे में अपना फैसला सुनाऊंगा ।”
बादशाह बलबन ने इसकी इजाजत दे दी और चौधरी साहब ने
अपना घोड़ा उन 19 घोड़ों वाली कतार के आखिर में बांध
दिया, इस तरह
कुल बीस घोड़े हो गये ।
अब चौधरी ने उन घोड़ों का बंटवारा इस तरह कर दिया-
- आधा हिस्सा (20 ¸ 2 = 10) यानि दस घोड़े उस अमीर के बड़े
बेटे
को दे दिये ।
- चौथाई हिस्सा (20 ¸ 4 = 5) यानि पांच घोडे मंझले बेटे
को दे
दिये ।
- पांचवां हिस्सा (20 ¸ 5 = 4) यानि चार घोडे छोटे बेटे को दे
दिये ।
इस प्रकार उन्नीस (10 + 5 + 4 = 19)
घोड़ों का बंटवारा हो गया ।
बीसवां घोड़ा चौधरी रामसहाय का ही था जो बच गया ।
बंटवारा करके
चौधरी ने सबसे कहा - “मेरा अपना घोड़ा तो बच ही गया है,
इजाजत
हो तो इसको मैं ले जाऊं ?”
बादशाह ने हां कह दी और चौधरी साहब का बहुत सम्मान और
तारीफ
की । चौधरी रामसहाय अपना घोड़ा लेकर अपने गांव सौरम
की तरफ कूच
करने ही वाले थे, तभी वहां पर मौजूद कई हजार दर्शक इस पंच के
फैसले
से गदगद होकर नाचने लगे और कवि अमीर खुसरो ने जोर से
कहा -
“अनपढ़ जाट पढ़ा जैसा, पढ़ा जाट खुदा जैसा”।
सारी भीड़ इसी पंक्ति को दोहराने लगी । तभी से यह
कहावत
हरियाणा,
पंजाब, राजस्थान व उत्तरप्रदेश तंथा दूसरी जगहों पर फैल गई ।
यहां यह बताना भी जरूरी है कि 19 घोड़ों के बंटवारे के समय
विदेशी यात्री और इतिहासकार इब्नबतूता भी वहीं दिल्ली दरबार में
मौजूद था । यह वृत्तांत सर्वखाप पंचायत के अभिलेखागार में
मौजूद है। धन्यवाद।
ये है जाटों का इतिहास दोस्तों।
ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करे

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