Monday, 9 April 2018

डा महेश सिन्हा की एक बहुत उपयोगी पोस्ट --- मस्तिष्क आघात के मरीज़ को कैसे पहें? चानें?

डा महेश सिन्हा की एक बहुत उपयोगी पोस्ट ---
मस्तिष्क आघात के मरीज़ को कैसे पहें? चानें?

मस्तिष्क आघात --जी वही, जिसे कईं बार ब्रेन-स्ट्रोक भी कह दिया जाता है अथवा आम भाषा में दिमाग की नस फटना या ब्रेन-हैमरेज भी कह देते हैं।
इस के बारे में पोस्ट डाक्टर साहब लिखते हैं ----

एक पार्टी चल रही थी, एक मित्र को थोड़ी ठोकर सी लगी और वह गिरते गिरते संभल गई और अपने आस पास के लोगों को उस ने यह कह कर आश्वस्त किया कि सब कुछ ठीक है, बस नये बूट की वजह से एक ईंट से थोड़ी ठोकर लग गई थी। (आस पास के लोगों ने ऐम्बुलैंस बुलाने की पेशकश भी की).
साथ में खड़े मित्रों ने उन्हें साफ़ होने में उन की मदद की और एक नई प्लेट भी आ गई। ऐसा लग रहा था कि इन्ग्रिड थोड़ा अपने आप में नहीं है लेकिन वह पूरी शाम पार्टी तो एकदम एन्जॉय करती रहीं। बाद में इन्ग्रिड के पति का लोगों को फोन आया कि कि उसे हस्पताल में ले जाया गया लेकिन वहां पर उस ने उसी शाम को दम तोड़ दिया।

दरअसल उस पार्टी के दौरान इन्ग्रिड को ब्रेन-हैमरेज हुआ था --अगर वहां पर मौजूद लोगों में से कोई इस अवस्था की पहचान कर पाता तो आज इन्ग्रिड हमारे बीच होती।

ठीक है ब्रेन-हैमरेज से कुछ लोग मरते नहीं है --लेकिन वे सारी उम्र के लिये अपाहिज और बेबसी वाला जीवन जीने पर मजबूर तो हो ही जाते हैं।

जो नीचे लिखा है इसे पढ़ने में केवल आप का एक मिनट लगेगा ---

स्ट्रोक की पहचान ---

एक न्यूरोलॉजिस्ट कहते हैं कि अगर स्ट्रोक का कोई मरीज़ उन के पास तीन घंटे के अंदर पहुंच जाए तो वह उस स्ट्रोक के प्रभाव को समाप्त (reverse)भी कर सकते हैं---पूरी तरह से। उन का मानना है कि सारी ट्रिक बस यही है कि कैसे भी स्ट्रोक के मरीज़ की तुरंत पहचान हो, उस का निदान हो और उस को तीन घंटे के अंदर डाक्टरी चिकित्सा मुहैया हो, और अकसर यह सब ही अज्ञानता वश हो नहीं पाता।

स्ट्रोक के मरीज़ की पहचान के लिये तीन बातें ध्यान में रखिये --और इस से पहले हमेशा याद रखिये ----STR.

डाक्टरों का मानना है कि एक राहगीर भी तीन प्रश्नों के उत्तर के आधार पर एक स्ट्रोक के मरीज की पहचान करने एवं उस का बहुमूल्य जीवन बचाने में योगदान कर सकता है.......इसे अच्छे से पढ़िये और मन में बैठा लीजिए --

S ---Smile आप उस व्यक्ति को मुस्कुराने के लिये कहिए।

T-- talk उस व्यक्ति को कोई भी सीधा सा एक वाक्य बोलने के लिये कहें जैसे कि आज मौसम बहुत अच्छा है।

R --- Raise उस व्यक्ति को दोनों बाजू ऊपर उठाने के लिये कहें।

अगर इस व्यक्ति को ऊपर लिखे तीन कामों में से एक भी काम करने में दिक्कत है , तो तुरंत ऐम्बुलैंस बुला कर उसे अस्पताल शिफ्ट करें और जो आदमी साथ जा रहा है उसे इन लक्षणों के बारे में बता दें ताकि वह आगे जा कर डाक्टर से इस का खुलासा कर सके।

नोट करें ---- स्ट्रोक का एक लक्षण यह भी है --

1. उस आदमी को जिह्वा (जुबान) बाहर निकालने को कहें।
2. अगर जुबान सीधी बाहर नहीं आ रही और वह एक तरफ़ को मुड़ सी रही है तो भी यह एक स्ट्रोक का लक्षण है।

एक सुप्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट का कहना है कि अगर इस ई-मेल को पढ़ने वाला इसे आगे दस लोगों को भेजे तो शर्तिया तौर पर आप एक बेशकीमती जान तो बचा ही सकते हैं ....
और यह जान आप की अपनी भी हो सकती है -।

चिड़िय जब जीवित रहती है
तब वो किड़े-मकोड़ों को खाती है
और चिड़िया जब मर जाती है
तब किड़े-मकोड़े उसको खा जाते है।
👉🏿इसलिए इस बात का ध्यान रखो की समय और स्थिति कभी भी बदल सकते है
👉🏿इसलिए कभी किसी का अपमान मत करो
👉🏿कभी किसी को कम मत आंको।
👉🏿तुम शक्तिशाली हो सकते हो पर समय तुमसे भी शक्तिशाली है।
👉🏿एक पेड़ से लाखो माचिस की तिलियाँ बनाई जा सकती है।
 पर एक माचिस की तिली से लाखो पेड़ भी जल सकते है।
👉🏿कोई चाहे कितना भी महान क्यों ना हो जाए, पर कुदरत कभी भी किसी को महान  बनने का मौका नहीं देती।
👉🏿कंठ दिया कोयल को, तो रूप छीन लिया ।
👉🏿रूप दिया मोर को, तो ईच्छा छीन ली ।
👉🏿दी ईच्छा इन्सान को, तो संतोष छीन लिया ।
👉🏿दिया संतोष संत को, तो संसार छीन लिया।
☝🏿मत करना कभी भी ग़ुरूर अपने आप पर 'ऐ इंसान'
भगवान ने तेरे और मेरे जैसे कितनो को मिट्टी से बना कर, मिट्टी में मिला दिए ।
☝🏿 इंसान दुनिया में तीन चीज़ो के लिए मेहनत करता है

1-मेरा नाम ऊँचा हो .
२ -मेरा लिबास अच्छा हो .
3-मेरा मकान खूबसूरत हो ..

☝🏿लेकिन इंसान के मरते ही भगवान उसकी तीनों चीज़े
सबसे पहले बदल देता है

१- नाम = (स्वर्गीय )
२- लिबास = (कफन )
३-मकान = ( श्मशान )

👉🏿जीवन की कड़वी सच्चाई जिसे हम समझना नहीं चाहते 

ये चन्द पंक्तियाँ
जिसने भी लिखी है
खूब लिखी है।

👉🏿एक पत्थर सिर्फ एक बार मंदिर जाता है और भगवान बन जाता है ..
इंसान हर रोज़ मंदिर जाते है फिर भी पत्थर ही रहते है ..!!

👉🏿एक औरत बेटे को जन्म देने के लिये अपनी सुन्दरता त्याग देती है.......
और
वही बेटा एक सुन्दर बीवी के लिए अपनी माँ को त्याग देता है
जीवन में हर जगह
हम "जीत" चाहते हैं...

👉🏿सिर्फ फूलवाले की दूकान ऐसी है
जहाँ हम कहते हैं कि हमें
"हार" चाहिए।
➖♦➖♦➖♦
➖♦➖♦➖♦➖
 ये ज़िन्दगी जैसी भी है,
बस एक ही बार मिलती है।
ये SMS जरुर सबको भेजना ..ll  🙌🙌🙌🙌🙌🙌🙌🙌🙌
संसार में जन्म लेने के लिए माँ के गर्भ में 9 महीने रुक सकते है।
चलने के लिए 2 वर्ष,
स्कूल में प्रवेश के लिए 3 वर्ष,
मतदान के लिए 18 वर्ष,
नौकरी के लिए 22 वर्ष,
शादी के लिये 25 -30 वर्ष,
इस तरह अनेक मौकों के लिए हम इंतजार करते है। लेकिन,,,,,,
गाड़ी ओवरटेक करते समय 30 सेकंड भी नही रुकते,,,,।।
बाद में एक्सीडेंट होने के बाद जिन्दा रहे तो एक्सीडेंट निपटाने के लिए कई घण्टे, हॉस्पिटल में कई दिन, महीने या साल निकाल देते है।
कुछ सेकंड की गड़बड़ी कितना भयंकर परिणाम ला सकती है। जाने वाले चले जाते है, पीछे वालो का क्या। इस पर विचार किया कभी किया नही।
फिर हर बार की तरह,नियति को दोष ।।
इसलिये सही रफ्तार में सही दिशा में वाहन संभल कर चलायें सुरक्षित पहुंचे।
आपका अपना मासूम परिवार आपका घर पर इंतजार कर रहा है


_* *
आप सभी से हाथ🙏🙏🙏🙏 जोड़कर निवेदन है इसे आगे फैलाने में मेरी मदद करें।क्या पता 1% लोग भी मेरे विचार से सहमत हो तो उनकी ज़िन्दगी बच जाए।

"एक बार एक आलू ने

भिंड़ी को फोन करके कहा

I Love U..! 💝💝

भिंड़ी को आया

बहुत गुस्सा ,

उसने आलू को बहुत

खरी खोटी सुनायी..!!!!😡😠😡

बोली ::::::::::::>-

तुम इतने मोटे और सस्ते ,

मैं इतनी स्लिम और सेक्सी!👸

आलू का तो बस

दिल ही टूट गया..!!!! 💔💘 तब से ,

फिर आलू ने इतनी

सब्ज़ियाँ पटाई की ,💕💞💕💞

आप खुद देख सकते हो!

👇..... 👇.....👇......

👉 आलू ~ गोबी 💓

👉 आलू ~ बेंगन 💓

👉 आलू ~ शिमला मिर्ची💓

👉 आलू ~ पालक💓

👉 आलू ~ मटर💓

👉 आलू ~ गाजर💓

👉 आलू ~ छोले💓

👉 आलू ~ मेथी,💓

👉 आलू ~ टमाटर 💓

.....और.....

भिंड़ी उस दिन से

आज तक भी अकेली है..!😔😔

Moral ~ जो ज्यादा Attitude दिखाता है ,

वह हमेशा अकेला ही

रह जाता हैं..........

😜😜😂😂😆😆

– :: हँसना मना है :: –

😷😷😷😷😷😷😷😷😷

एक दिन – निम्बु, केला और नारियल तीनों साथ में बैठे अपनी-अपनी कहानी सुना रहे थे!!!!!!…..

😷😷😷😷😷😷😷😷😷

1). निम्बु – लोग बड़ी बेरहमी से मुझे बीच में से काटते हैं और पूरी तरह से निचोड़ लेते हैं!!!!!…..

😷😷😷😷😷😷😷😷😷

2). केला- ये तो कुछ भी नहीं,

बेशर्म मुझे तो नंगा कर के खा जाते हैं!!!!!!……

😷😷😷😷😷😷😷😷😷

3). नारियल – अपनी आपबीती सुनाते हुए, ये तो कुछ भी नहीं भाईयो,

साले कमीने मुझे इतना जोर से पत्थर पर मारते हैं कि,

मेरी सुसु निकल जाती है और

उसे भी गिलास में ले के पी जाते हैं!!!!!!,,,,……?????~~

😷😷😷😷😷😷😷😷

हस रहे हो भाई नया है फारवर्ड करो 😜😜😜😜😜" -

"सुनो..कल मम्मी पापा आ रहे हैं दस दिन रूकेंगे..
एडजस्ट कर लेना..
"मयंक ने स्वाति को बैड पर लेटते हुए कहा।
"..कोई बात नही आने दिजिए आपको शिकायत का कोई मौका नही मिलेगा.."
स्वाति ने भी प्रति उत्तर में कहा और स्वाति ने लाइट बन्द कर दी और दोनो सो गए।
सुबह जब मयंक की आंख खुली तो स्वाति बिस्तर छोड़ चुकी थी। "चाय ले लो..स्वाति ने मयंक की तरफ चाय की प्याली को बढाते हुए कहा..
अरे तुम आज इतनी जल्दी नहा ली..
हां तुमने रात को बताया था कि आज मम्मी पापा आने वाले हैं तो सोचा घर को कुछ व्यवस्थित कर लूं..स्वाति ने चाय की चुस्की लेते हुए कहा..वैसे..किस वक्त तक आ जाएंगे वो लोग..
"दोपहर वाली गाड़ी से पहुंचेंगे चार तो बज ही जाऐंगे..
मयंक ने चाय का कप खत्म करते हुए जवाब दिया..
"स्वाति..देखना कभी पिछली बार की तरह.."नही नही..पिछली बार जैसा कुछ भी नही होगा..स्वाति ने भी कप खत्म करते हुए मयंक को कहा और उठकर रसोई की तरफ बढ गई।
मयंक भी आफिस जाने के लिए तैयार होने के लिए बाथरूम की तरफ बढ गया।
नाश्ता करने के बाद मयंक ने स्वाति से पूछा "..तुम तैयार नही हुई..क्या बात..आज स्कूल की छुट्टी है..??..
" नही..आज तुम निकलो मैं आटो से पहुंच जाऊंगी..थोड़ा लेट निकलूंगी..स्वाति ने लंच बाक्स थमाते हुए मयंक को कहा।
"..बाय बाय..कहकर मयंक बाइक से आफिस के लिए निकल गया। और स्वाति घर के काम में लग गई..
"..मुझे तो बहुत डर लग रहा है मैं तुम्हारे कहने से वहां चल तो रहा हूं लेकिन पिछली बार बहू से जिस तरह खटपट हुई थी मेरा तो मन ही भर गया था।
ना जाने ये दस दिन कैसे जाने वाले हैं..
मयंक के पिताजी मयंक की मम्मी से कह रहे थे।
"..अजी..भूल भी जाइये..बच्ची है..
कुछ हमारी भी तो गलती थी।
हम भी तो उससे कुछ ज्यादा ही उम्मीद लगाए बैठे थे।
उन बातों को सालभर बीत गया है..
क्या पता कुछ बदलाव आ गया हो।
इंसान हर पल कुछ नया सीखता है..
क्या पता कौन सी ठोकर किस को क्या सिखा दे..
मयंक की मां ने पिताजी को हौंसला देते हुए कहा..
मयंक की मां यह कहकर चुप हो गई और याद करने लगी..
दो भाइयों में मयंक बड़ा था और विवेक छोटा।
मयंक गांव से दसवीं करके शहर आ गया..
आगे पढने और विवेक पढाई में कमजोर था इसलिए गांव में ही पिताजी का खेती बाड़ी में हाथ बंटाने लगा।
मयंक बी_टेक करके शहर में ही बीस हजार रू की नौकरी करने लगा।
स्वाति से कोचिंग सेन्टर में ही मयंक की जान पहचान हुई थी यह बात मयंक ने स्वाति से शादी के कुछ दिन पहले बताई।
पिताजी कितने दिन तक नही माने थे इस रिश्ते के लिए..
वो तो मैने ही समझा बुझाकर रिश्ते के लिए मनाया था वरना ये तो पड़ौस के गांव के अपने दोस्त की बेटी माला से ही रिश्ता करने की जिद लगाए बैठे थे।
गांव आकर स्वाति के घर वालों ने शादी की थी..
दो साल होने को आए उस दिन को भी।
शादी करके दोनो शहर में ही रहने लगे।
स्वाति भी प्राइवेट स्कूल में टीचर की जाॅब करने लगी।
पिछली बार जब गांव से आए थे तो मन में बड़ी उमंगे थी पर सात आठ दिन में ही बहू के तेवर और बेटे की बेबसी के चलते वापस गांव की तरफ हो लिए।
कई बार मयंक को फोन करकर बोला भी की बेटा गांव आ जा..पर वो हर बार कह देता..
मां छुट्टी ही नही मिलती कैसे आऊं..
लेकिन मैं ठहरी एक मां..आखिर मां का तो मन करता है ना अपने बच्चे से मिलने का..बहू चाहे कैसा भी बर्ताव करे..
काट लेंगे किसी तरह ये दस दिन..
पर बच्चे को जी भरकर देख तो लेंगे..
"अरे भागवान..उठ जाओ..
स्टेशन आ गया उतरना नही है क्या..
मयंक के पिताजी की आवाज मयंक की मां को यादों की दुनियां से वापस खींच लाई..
सामान उठाकर दोनो स्टेशन से बाहर आ गए और आटो में बैठकर दोनो मयंक के घर के लिए रवाना हो गए..
घर पहुंचे तो बहू घर पर ही थी।
जाते ही बहू ने दोनो के पैर छुए..
हम दोनो को ड्राइंगरूम में बिठाकर हम दोनो के लिए ठण्डा ठण्डा शरबत लाई हम लोगों ने जैसे ही शरबत खत्म किया बहू ने कहा "पिता जी...
आप सफर से थक गए होंगे..नहा लिजिए..
सफर की थकान उतर जाएगी फिर मैं आपके लिए खाना लगा देती हूं।
पिताजी नहाने चले गए। बहू रसोई में घुसकर खाना बनाने लगी। थोड़ी देर में मयंक भी आ गया।
फिर बैठकर सबने थोड़ी देर बातें की और फिर सबने खाना खाया। मयंक और बहू सोने चले गए और हम भी सो गए।
सुबह पांच बजे पिताजी उठे तो तो बहू उठ चुकी थी पिताजी को उठते ही गरम पानी पीने की आदत थी बहू ने पहले से ही पिताजी के लिए पानी गरम कर रखा था नहा धोकर पिताजी को मंदिर जाने की आदत थी..
बहू ने उनको जल से भरकर लौटा दे दिया..
नाश्ता भी पिताजी की पसंद का तैयार था..
सबको नाश्ता करवाकर बहू मयंक के साथ चली गई पिताजी ने भी चैन की सांस ली..
चलो अब चार पांच घण्टे तो सूकून से निकलेंगे।
दिन के खाने की तैयारी बहू करकर गई थी सो मैने चार पांच रोटियां हम दोनो की बनाई और खा ली।
स्कूल से आते ही बहू फिर से रसोई में घुस गई और हम दोनों के लिए चाय बना लाई..
शाम को हम दोनों को लेकर बहू पास के पार्क में गई वहां उसने हमारा परिचय वहां बैठे बुजुर्गों से करवाया..
वो अपनी सहेलियों से बात करने लगी और हम अपने नए परिचितों से परिचय में व्यस्त हो गए।
शाम के सात बज चुके थे..हम घर वापस आ गए।
मयंक भी थोड़ी देर में घर आ गया।
बैठकर खूब सारी बातें हुई।
बहू भी हमारी बातों में खूब दिलचस्पी ले रही थी थोड़ी देर बाद सब सोने चले गए।
अगले दिन सण्डे था बहू, मयंक और हम दोनो चिड़ियाघर देखने गए..
हमारे लिए ताज्जुब की बात ये थी की प्रोग्राम बहू ने बनाया था..बहू ने खूब अच्छे से चिड़ियाघर दिखाया और शाम को इण्डिया गेट की सैर भी करवाई..
खाना पीना भी हम सबने बाहर ही किया..
फिर हम सब घर आ गए और सो गए..
इस खुशमिजाज रूटीन से पता ही नही चला वक्त कब पंख लगाकर उड़ गया..
कहां तो हम सोच रहे थे कि दस दिन कैसे गुजरेंगे और कहां पन्द्रह दिन बीत चुके थे।
आखिर कल जब विवेक का फोन आया कि फसल तैयार हो गई है और काटने के लिए तैयार है तो हमें अगले ही दिन गांव वापसी का प्रोग्राम बनाना पड़ा।
रात का खाना खाने के बाद हम कमरे में सोने चले गए तो बहू हमारे कमरे में आ गई बहू की आंखों से आंसू बह रहे थे।
मैने पूछा.."क्या बात है बहू..रो क्यों रही हो.?
तो बहू ने पूछा "..पिताजी, मां जी..
पहले आप लोग एक बात बताइये..
पिछले पन्द्रह दिनों में कभी आपको यह महसूस हुआ की आप अपनी बहू के पास है या बेटी के पास..
"नही बेटा सच कहूं तो तुमने हमारा मन जीत लिया..
हमें किसी भी पल यह नही लगा की हम अपनी बहू के पास रह रहें हैं तुमने हमारा बहुत ख्याल रखा लेकिन एक बात बताओ बेटा..
"तुम्हारे अंदर इतना बदलाव आया कैसे..??
"पिताजी..पिछले साल मेरे भाई की शादी हुई थी।
मेरे मायके की माली हालात बहुत ज्यादा बढिया नही है।
इन छुट्टियों में जब मैं वहां रहने गई तो मैने अपने माता पिता को एक एक चीज के लिए तरसते देखा..
बात बात पर भाभी के हाथों तिरस्कृत होते देखा..
मेरा भाई चाहकर भी कुछ नही कर सकता था।
मैं वहां उनके साथ हो रहे बर्ताव से बहुत दुखी थी।
उस वक्त मुझे अपनी करनी याद आ रही थी..
कि किस तरह का सलूक मैंने आप दोनो के साथ किया था।
""किसी ने यह बात सच ही कही है कि जैसा बोओगे वैसा काटोगे।""
मैं अपने मां बाप का भविष्य तो नही बदल सकती लेकिन खुद को बदल कर मैं ये उम्मीद तो अपने आप में जगा ही सकती हूं कि कभी मेरी भाभी में भी बदलाव आएगा और मेरे मां बाप भी सुखी होंगे...
बहू की बात सुनकर मेरी आंखे भर आई।
मैने बहू को खींचकर गले से लगा लिया..
"हां बेटा अवश्य एक दिन अवश्य ऐसा होगा...
ठोकर सबको लगती है लेकिन सम्भलता कोई कोई ही है
"लेकिन हम दुआ करेंगे कि तुम्हारी भाभी भी सम्भल जाए..
बहू अब भी रोए जा रही थी उसकी आंखों से जो आंसू गिर रहे थे वो शायद उसके पिछली गलतियों के प्रायश्चित के आंसू थे..!!                       राधे राधे
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